रात 3 बजे आने वाली आवाज़ – जो कभी इंसान नहीं थी | Raat 3 Baje Ki Darawani Kahani


रात 3 बजे वाली हॉरर कहानी की शुरुआत किसी चीख, किसी भूत या किसी अचानक दिखाई देने वाली परछाईं से नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत एक आदत से हुई थी, ऐसी आदत जिससे मैं खुद डरने लगा था। हर रात, बिना किसी कारण, बिना किसी सपने के, मेरी नींद ठीक तीन बजे खुल जाती थी। पहले कुछ दिनों तक मैंने इसे नज़रअंदाज़ किया। नई जगह थी, नई नौकरी थी, दिमाग़ पर बोझ था। मैंने खुद को समझाया कि यह सब थकान और तनाव की वजह से हो रहा है। लेकिन कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जिन्हें बार-बार अनदेखा नहीं किया जा सकता।

दिल्ली आने के बाद पैसों की कमी के कारण मैंने शहर से थोड़ा दूर एक पुराना मकान किराए पर लिया था। मकान बाहर से साधारण दिखता था, लेकिन अंदर घुसते ही अजीब-सी ठंडक महसूस होती थी। यह ठंड मौसम की नहीं थी, बल्कि ऐसी थी जैसे दीवारों में कुछ दबा हुआ हो। पहले ही दिन मुझे वहाँ रहना अच्छा नहीं लगा, लेकिन किराया कम था और उस समय मेरे पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था।

मकान मालिक शर्मा जी ने चाबी देते समय ऊपर वाली मंज़िल की ओर इशारा करके कहा था कि वह हिस्सा खाली है और रात में वहाँ जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। उनका यह कहना मुझे थोड़ा अजीब लगा, लेकिन मैंने ज़्यादा सवाल नहीं किए। उस वक्त मुझे क्या पता था कि यही चेतावनी आने वाले दिनों में मेरे लिए सबसे डरावनी याद बन जाएगी।

पहली रात जब मेरी नींद तीन बजे खुली, तब कमरे में सन्नाटा था। बाहर कहीं दूर से कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आ रही थी। मैंने घड़ी देखी और करवट बदलकर फिर सोने की कोशिश की। लेकिन दूसरी रात भी ठीक ऐसा ही हुआ। और तीसरी रात भी। हर बार नींद खुलते ही दिल तेज़ धड़कने लगता था, जैसे शरीर पहले से जानता हो कि कुछ ग़लत होने वाला है।

पाँचवीं रात पहली बार मैंने वह आवाज़ सुनी। बहुत हल्की, बहुत खुरदुरी। वह चलने की आवाज़ नहीं थी। उसमें पैरों की पहचान नहीं थी। वह ऐसी आवाज़ थी जैसे कोई बहुत भारी चीज़ ज़मीन पर घिसटती हुई आगे बढ़ रही हो। मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। मैं बिस्तर पर सीधा बैठ गया और साँस रोके सुनने लगा। आवाज़ कुछ सेकंड तक चली और फिर अचानक बंद हो गई। उस रात मैं दोबारा सो नहीं पाया।

अगली रात वह आवाज़ फिर आई। इस बार वह पहले से ज़्यादा साफ़ थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई ऊपर वाली मंज़िल से नीचे आने की कोशिश कर रहा हो। मुझे पसीना आने लगा। मैं दरवाज़े की ओर देखने लगा, लेकिन उसे खोलने की हिम्मत नहीं हुई। ऐसा महसूस हो रहा था जैसे दरवाज़े के दूसरी तरफ़ कुछ मौजूद है, कुछ ऐसा जो दिखाई नहीं देता लेकिन महसूस ज़रूर होता है।

तीसरे दिन मैंने पास में रहने वाली नेहा से बात की। मैंने बहुत साधारण तरीके से पूछा कि क्या उसे कभी रात में कोई अजीब आवाज़ सुनाई देती है। मेरा सवाल सुनते ही उसका चेहरा उतर गया। उसने मेरी आँखों में देखकर पूछा, “तीन बजे?” मैंने सिर हिला दिया। उसने बताया कि वह भी कई रातों से वही आवाज़ सुन रही है। ऊपर से नीचे आती हुई, घिसटने जैसी। उसने यह भी बताया कि उससे पहले इस मकान में रहने वाले लोग अचानक बिना बताए चले गए थे।

अब डर सिर्फ़ मेरे दिमाग़ में नहीं था, वह हकीकत बन चुका था। चौथी रात मैंने जागकर सब कुछ देखने का फैसला किया। लाइट बंद थी। कमरे में अंधेरा था। जैसे ही घड़ी ने तीन बजाए, वही आवाज़ फिर शुरू हो गई। इस बार वह इतनी पास थी कि मुझे लगा जैसे फर्श मेरे नीचे हिल रहा हो।

मैंने डरते-डरते दरवाज़े के नीचे से बाहर झाँका। बाहर जो दिखा, उसने मेरी आत्मा तक को सिहरा दिया। कोई खड़ा हुआ इंसान नहीं था। फर्श पर रेंगती हुई एक काली आकृति थी। उसके हाथ और पैर अजीब तरह से मुड़े हुए थे, जैसे वे कभी ठीक से काम ही नहीं करते रहे हों। वह मेरे दरवाज़े के सामने रुकी और फिर दरवाज़े पर खरोंच की आवाज़ आई। उस आवाज़ ने मेरे शरीर को सुन्न कर दिया।

अगले दिन मैं ऊपर वाली मंज़िल पर गया। वहाँ की बदबू और सड़न ने मेरा दम घोंट दिया। दीवारों पर गहरे निशान थे, जैसे किसी ने बार-बार रेंगने की कोशिश की हो। फर्श पर पुराने खून के दाग थे। एक पुराने अख़बार में छपी खबर ने मेरी रूह जमा दी। तीन साल पहले इसी मकान में एक लकवाग्रस्त आदमी अकेला रहता था। वह चल नहीं सकता था और मदद के लिए रेंगता था। उसकी मौत ठीक रात तीन बजे हुई थी।

उस रात मैं मकान छोड़कर चला गया। लेकिन रात 3 बजे वाली हॉरर कहानी वहाँ खत्म नहीं हुई। आज भी हर रात ठीक तीन बजे मेरी नींद खुल जाती है। फर्क बस इतना है कि अब वह आवाज़ किसी मकान से नहीं आती। वह मेरे बहुत पास से आती है, जैसे कोई अब भी मुझ तक पहुँचने की कोशिश कर रहा हो। अब मुझे समझ आ गया है कि कुछ डरावनी चीज़ें जगह से नहीं, इंसान से चिपक जाती हैं।

(नोट– दी गई कहानी काल्पनिक है, इसका किसी भी जीवित या निर्जीव वस्तु से कोई संबंध नहीं है। हमारा उद्देश्य अंधश्रद्धा फैलाना नहीं है, यह केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनायी गयी है।)

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