आधी रात श्मशान से लौटने वाला आदमी | Shamshan Ki Darawani Kahani
श्मशान से आधी रात लौटते समय हुई कई खौफनाक घटनाओं पर आधारित यह कहानी पाठक को डर और बेचैनी में जकड़ लेती है।
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श्मशान से आधी रात लौटते समय हुई कई खौफनाक घटनाओं पर आधारित यह कहानी पाठक को डर और बेचैनी में जकड़ लेती है।
आधी रात श्मशान से लौटने वाला आदमी | Shamshan Ki Darawani Kahani आगे पढियेअमावस्या की रात एक सुनसान स्टेशन पर हुई कई डरावनी घटनाएँ। यह स्टेशन वाली डरावनी कहानी धीरे-धीरे डर को असली बना देती है।
हर अमावस्या की रात स्टेशन पर खड़ी रहने वाली लड़की | Station Wali Darawani Kahani आगे पढियेगाँव के बीचों-बीच एक कुआँ था, जिसे ताले में बंद रखा गया था। कहा जाता है कि रात में वहाँ से बच्चों की आवाज़ आती है। भूतिया कुआं डरावनी कहानी जो साबित करती है कि कुछ जगहें लोगों को छोड़ने के बाद भी पीछा नहीं छोड़तीं।
भूतिया कुआं डरावनी कहानी आगे पढियेरात 3 बजे एक घर में आने वाली रहस्यमयी आवाज़ और उससे जुड़ी खौफनाक घटनाओं पर आधारित यह डरावनी कहानी नींद के बाद भी पीछा नहीं छोड़ती।
रात 3 बजे आने वाली आवाज़ – जो कभी इंसान नहीं थी | Raat 3 Baje Ki Darawani Kahani आगे पढिये
इस तरह वो धन जो मिला था वो शापित हो गया। वो शापित सिक्के सालो तक जमींन में गढ़े रहने के बाद भी वो शाप उनपे रह गया था।
लेकिन उस डायन की रूह तो उस बच्चे में रह गयी। और जैसे ही उस जमींन पर कुछ सालो बाद घर के पुराने मालिक ने काम चालू किया तो ये बक्सा मिल गया। जिनमे वो शापित सिक्के थे।
अशोक घर के अन्दर था लेकिन दूर से झरनों के पानी की आवाज वहाँ तक पहुच रही थी। उसने डायरी के पन्ने खोले और उसमे उसने वो पेन से लिखा ,
“मौत का राज”
मौत का राज – एक अनसुलझा रहस्य आगे पढिये
ऐ खुदा!!! आज पूछता हु तुझे,
मेरे मन में ये कैसा शोर हैं?
दिल आज भी भटकता हैं,
जैसे मेरी मंजिल कही और हैं।
मुरदाघर का नाम सुन के शेखर डर गया। उसको सहमा देख के शम्भू बोला, “येही वजह से मैं पैसे कमाई कर रहा हु। सभी लोग डरते हैं वहां जाने को। इसलिए कोई नहीं मिलता काम करने को। मैं करता हु तो मुझे पैसा भी बढ़िया मिलता हैं। मैं दारु लेके जाता हु और पीके सो जाता हु। मुरदों के साथ, मुरदा घर में।”
मुर्दाघर और जिन्दा लाश आगे पढिये
तुम से जुदा होकर
कहा जी पाएंगे हम,
सांसे गिनते रहेंगे …
तुम्हारी यादों के संग।
मान मिले कभी अपमान सही,
करता सब का स्वीकार रे,
झोली मेरी सदा रहे खाली,
मन भर के लेकिन जीता रे।
मैं फ़क़ीर कहलाता रे…….