पिशाचीनी – भूत की कहानी
पिशाचीनी – “मुझे पता था तू आयेगा” वही भयंकर आवाज अब बहोत ही ज्यादा जोर से सुनाई दे रही थी। अब वो सामने प्रकट हो गयी। वो भयंकर रूप में जमीं के ऊपर ही उड़ रही थी।
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पिशाचीनी – “मुझे पता था तू आयेगा” वही भयंकर आवाज अब बहोत ही ज्यादा जोर से सुनाई दे रही थी। अब वो सामने प्रकट हो गयी। वो भयंकर रूप में जमीं के ऊपर ही उड़ रही थी।
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सूखे गुलाब – आज अचानक से बारिश चालू हो गयी। वैसे नवम्बर में हमारे यहाँ बारिश होना आम बात नहीं है।
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होस्टल – “मिहिका बेटा जल्दी उठो तुम्हे तयारी करनी है न आज। अरे आज तुम्हे अपने नये कॉलेज जाना हैं। जल्दी तयारी करो।” मिहिका की माँ किचेन से आवाज लगा रहा थी।
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मौत का चौराहा – एक ऐसी भयंकर खौफनाक कहानी जो आपका दिल देहला देगी।
वो बारिश की अँधेरी रात थी। अमावस्या थी की पता नहीं लेकिन बाहर बहोत अँधेरा था।
मेरा देश मुझे पुकारे,
होशियार हो दुश्मन तू।
सरहद संभाल खड़ा है,
भारत माँ का सैनिक हु।
हाथ हातों में लेके,
चलना था।
दुनियां की रंगत,
तुम्हारे साथ देख लेते।
अगर तुम रुक जातें तो…
नीलाक्षी अपने माँ बाप की एकलौती संतान थी। पैसा नहीं था पर उसको बहोत प्यार से पाला था। नीलाक्षी को घर में सब नीला कहते थे। उसका ये नाम उसकी आँखों की वजह से पड़ा। उसकी आंखे आसमान की तरह नीली थी। लोग कहते थे की इसके लिए कोई राजकुमार ही ढूंडना होगा शादी के लिए। इतनी वो सुंदर थी।
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रात का शायद दूसरा पहर चल रहा था। इतनी रात को न जाने कहा से एक गाड़ी बहोत ही ज्यादा स्पीड से आती हुई दिखाई दे रही थी। वो गाड़ी उस मोड़ से अब गुजरने वाली थी,की अचानक ब्रेअक्स के लगने की आवाज आयी।
“कर्र…. र….र…….।
घर के बरामदे में,
जहा रखा था कुछ सामान।
वही पड़ा था धुल में,
वो संदूक पुराना सा।
तुम्हे याद है? वो बचपन के दिन,
जब हम सब साथ में हुआ करते थे।
झमाझम बारिश में हाथ हाथों में लेकें,
गाँव की गलियों में घुमा करते थे।